बदले एक्शन के साथ क्यों ज्यादा खतरनाक हो गए रवि बिश्नोई?


टीम इंडिया के लेग स्पिनर Ravi Bishnoi ने इंटरनेशनल क्रिकेट में धमाकेदार वापसी की है. उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मैच में 18 रन देकर 2 विकेट लिए थे. वह साल भर से टीम से बाहर थे.

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रवि बिश्नोई ने इंटरनेशनल क्रिकेट में धमाकेदार वापसी की है. (फोटो- PTI)

टीम इंडिया (Team India) के लेग स्पिनर रवि बिश्नोई (Ravi Bishnoi) ने टी20 वर्ल्ड कप से पहले धमाकेदार वापसी की है. टी20 इंटरनेशनल में नंबर-1 बॉलर रहे बिश्नोई के लिए 2025-2026 सीजन अच्छा नहीं रहा. उन्होंने भारत की टी20 टीम में जगह खो दी और आईपीएल में उनका प्रदर्शन फीका रहा. इस दौरान उन्होंने हार नहीं मानी और जमकर प्रैक्टिस की. उनकी मेहनत रंग लाई. 25 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में शानदार बॉलिंग करते हुए 2 विकेट लिए. इसके बाद उनके कोच शाहरुख ने उनकी गेंदबाजी को लेकर बड़ी बात बताई. 

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कड़ी मेहनत का नतीजा

तीसरे मैच में बेहतरीन गेंदबाजी के लिए कोच शाहरुख ने उनकी तारीफ की. उन्होंने माना कि कड़ी मेहनत की वजह से वह अपनी लय पाने में सफल रहे. पिछले सीजन में वह अपनी लेंथ पूरी तरह मिस कर गए थे. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा,

जब वह हमारे पास आए तो बदलाव करना चाहते थे. वह बैटिंग पर बहुत काम करना चाहते थे. ब‍िश्नोई इरादे के पक्के हैं. कुछ हफ्तों तक उन्होंने एकेडमी में एक बच्चे की तरह मेहनत की. वह जितना हो सके, उतना सीखना चाहते थे.

आईपीएल में नाकाम रहे

रवि बिश्नोई अक्सर विकेट लेने की काबिलियत के लिए जाने जाते हैं. आईपीएल 2025 में वह 9 मैचों में सिर्फ 11 विकेट ले पाए. कोच ने बताया कि उन्होंने बिश्नोई की दिक्कतें शुरू में देख ली थीं. वह रन-अप लेते समय वाइड ऑफ विकेट आने के बजाय सीधे दौड़ रहे थे. वाइड ऑफ विकेट रन-अप लेना उनका अपना स्टाइल है. सीधे रन-अप लेने से कई दिक्कतें और बढ़ गईं. शाहरुख के मुताबिक,

बॉल छोड़ते समय उनका नॉन बॉलिंग हैंड बहुत सीधा हो गया था. वह गेंद को 11 बजे के एंगल के साथ रिलीज कर रहे थे. जबकि लेग स्पिनर्स अमूमन एक बजे के एंगल के साथ गेंद रिलीज करते हैं. वह क्रीज का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे.

बिश्नोई ने कैसे लय हासिल की?

रवि बिश्नोई धुन के पक्के हैं. उन्होंने सुबह 5 बजे से ट्रेनिंग शुरू की. वह दिन में दो बार, 4 घंटे ट्रेनिंग करते थे. इस दौरान वह रेड और वाइट बॉल दोनों से प्रैक्टिस करते. पद्योत सिंह राठौर उनके कोचेस में से एक रहे हैं. वह चाहते थे कि बिश्नोई पहले से अलग खिलाड़ी बनें. उन्होंने कहा,

रवि बिश्नोई ने एकेडमी में बहुत ओवर्स डाले. वह दोबारा इंडियन टीम में वापस आकर डिफरेंट बॉलर बनना चाहते थे. मैं कहूंगा यह रवि का नया वर्जन है. पिछले कुछ महीने में उन्होंने बहुत सुधार किया है.

बदल गए बिश्नोई

ऑफ सीजन में की गई मेहनत का असर डोमेस्टिक क्रिकेट में दिखाई पड़ा. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने 7 मैचों में 9 विकेट लिए. विजय हजारे ट्रॉफी में उनकी परफॉर्मेंस में सुधार दिखा. उन्होंने 12 मैचों में 12 विकेट चटकाए. वहीं, जब रवि बिश्नोई को न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीसरे मैच में खेलने का मौका मिला, तो उन्होंने इम्पैक्टफुल बॉलिंग करते हुए 4 ओवर में 18 रन देकर 2 विकेट लिए. कुल मिलाकर एक्शन सुधारने के बाद रवि बिश्नोई अब ज्यादा घातक हो गए हैं. 

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